अगर तू बुला ले
बंधनो के चक्रब्यूह में मैं हूँ घिरा हुआ
इसे तोडना चाहता हूँ
अगर तू बुला ले
आसुओं की धारा बहती है दुखों से
इन्हे रोकना चाहता हूँ
अगर तू बुला ले
ख़ुशी से झूमता है कभी मन ये मेरा
इसे स्थिर बनाना चाहता हूँ
अगर तू बुला ले
ज़िन्दगी के उतार चढ़ाव मुझे है थका रहे
इन्हे समतल मनाता हूँ
अगर तू बुला ले
राजा बनने का मन होता है कभी
मैं फकीर बन जाऊ
अगर तू बुला ले
ज़िन्दगी जीने का मजा है आ रहा
मैं मरना चाहता हूँ
अगर तू बुला ले
अजय लोहनी ।
nice dude :)
ReplyDeletegood one..
ReplyDeleteBahut Khoob. Apni dusari kavitao ko bhi yaha add karo.
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